अपनी किस्मत के निर्माता आप खुद ही है

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अपनी किस्मत के निर्माता 
आप  खुद ही है | हरेक 
विचार , भावना इच्छा और 
कर्म एक शक्ति पैदा करता हैं | 
अच्छा और बुरा दोनों ही हमें 
प्रभावित करते हैं , और तब तक 
हम पर हावी रहते है जब तक 
की हम उनके बीच संतुलन 
नहीं पैदा कर देते | 

सृजनशील  व्यक्ति 
कुछ न कुछ कर गुजरने 
की इच्छा – शक्ति से प्रेरित रहता हैं , न की 
दुसरो को पीछे छोड़ने की चाह से |

हमारी पृवत्ति और 
हमारी  इच्छा – शक्ति कैंची के दो फलों की तरह हैं | 
एक फल अपनी मर्जी करने की 
आजादी हैं और दूसरा फल प्ररेणा और पृवत्ति | 
जब दोनों फल मिलकर चलते है  तब कैंची अपना 
काम करती है | 

deepakaneriya

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