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सुविचार: आदि शंकराचार्य की शिक्षाएं

भारत में चार कोनों में चार मठों की स्थापना की, जो अभी तक पवित्र माने जाते हैं। इन पर आसीन संन्यासी ‘शंकराचार्य’ कहलाते हैं।

  • मन को जीतने वाला ही सच्चा विजेता होता है
  • ब्रह्म ही सत्य है, बाकी दुनिया बदलती रहती है।
  • हम सबके भीतर एक ही ब्रह्म बसता है।
  • अविद्या के कारण ही इंसान दुःखी रहता है।
  • आत्मा को जानने से शांति मिलती है।
  • जो अपने असली स्वरूप को पहचान लेता है, वही असली आनंद पाता है।
  • धर्म का असली मतलब मन की शुद्धि है, कोई दिखावा नहीं।
  • शांति बाहर से नहीं, भीतर से आती है।
  • नाशवान चीजों से मोह ही हमारे दुःख का सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • जो खुद को जान लेता है, वह मुक्त हो जाता है।
  • लोभ और क्रोध से मन अशांत होता है।
  • सादगी में ही खूबसूरती है।
  • भक्ति बिना जीवन अधूरा है।
  • सत्य बोलना सबसे बड़ा धर्म है।
  • मन को जीतने वाला ही सच्चा विजेता है।
  • शांति आत्मज्ञान से आती है, दौलत से नहीं।

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