Self Awareness

अशांति से उबरने के तरीके: गहन विचार

मन सशक्त हो, इसके लिये नया खोजें, नया सोचें

किसी दुखी-अशांत को देखकर खुद को अशांत कर लेना सरल अर्थों में एक प्रकार की नकल ही तो है क्योंकि नकल करने के लिए किसी बौद्धिक ऊंचाई की, चिंतन की, मनन या मंथन की आवश्यकता नहीं होती है। जो कुछ सामने दिख रहा है उसको हमने बहुत ही सहज रीति से फॉलो कर लिया, हमारा मन बिना किसी प्रयास के उसके साथ तारतम्य स्थापित कर लेता है। हमारे पास अपना ओरिजिनल तो कुछ हुआ ही नहीं, हमारी कुछ रचनात्मकता तो प्रकट हुई नहीं। हां, हम उन लोगों से तो बहुत अच्छे हैं जो किसी को अशांत या परेशान देखकर उनकी खिल्ली उड़ाते हैं, और अधिक परेशान करने की कोशिश करते हैं या उनके दुख-अशांति का नाजायज फायदा उठाते हैं, उनका और अधिक शोषण करते हैं लेकिन यहां हम ऐसे गिरे हुए लोगों की तो चर्चा नहीं कर रहे हैं, यहां हम बहुत ऊंचे उठे हुए लोगों की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें और भी ऊंचे उठ करके किसी का कोई फायदा करना है। नकल करने वाला तो सामने वाले से कमतर हुआ, एक तरह से उसके अधीन हुआ, उससे कमजोर हुआ, उसका कल्याण कैसे करेगा! हम कुछ नया खोजें, नया सोचें और कुछ नवीन विचार प्रदान करें ताकि उसका मन सशक्त हो ।

शिव भगवानुवाचः ‘सहानुभूति के कारण सहयोग देना दूसरी बात है लेकिन दूसरे के कारण स्वयं नीचे आ जाना, यह ठीक नहीं। न व्यर्थ सुनो, न देखो, सेवा के भाव से न्यारा होकर देखो, दूसरे के कारण अपना समय और खुशी न गंवाओ तो सदा उड़ती कला में जाते रहेंगे। अपना निजी संस्कार बनाओ कि हर बात में मुझे आगे बढ़ना है। दूसरा बढ़े या न बढ़े। दूसरे के पीछे स्वयं नीचे नहीं आना है।’

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