भारतीय पैरालंपिक निशानेबाज अवनि लेखरा की कहानी |

टोक्यो 2020: पैरालिंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज अवनी की कहानी |

भारतीय पैरालंपिक निशानेबाज अवनि लेखरा जयपुर की रहने वाली है। इनके पिता का नाम प्रवीण लेखरा एवं माता का नाम श्‍वेता लेखरा है। अवनि के पिता प्रवीण लखेरा रेवेन्‍यू विभाग में आरएएस के पद पर गगांनगर में कार्यरत है। सन् 2012 मे अवनि को एक हादसे का शिकार होना पड़ा। जब अवनि 11 साल की थी तो अपने पिता के साथ जयपुर से धौलपुर जाते समय उनका एक्‍सीडेंट हो गया। इस दुर्घटना में अवनि के पिता तो ठीक हो गए परन्‍तु अवनि की रीढ़ की हड्डी टूट गई।छोटी सी उम्र में व्‍हील चेयर पर होने के बाद भी उन्‍होने हार नही मानी। अवनि ने उस दौरान अभिनव बिन्‍द्रा के बारे में पढ़ा तथा उनके प्रेरणा पाकर आगे की प्रेरणा मिली। अपाहित होते हुए भी निशानेबाज अवनि ने लगातार सघंर्ष किया एवं आज टोक्‍यो पैरालंपिक में Gold Medal जीतकर इतिहास रचा है

और 2021 में, उसने बिंद्रा के प्रतिष्ठित बीजिंग 2008 पल से मेल खाया जब उसने पैरालिंपिक में शूटिंग में भारत का पहला पदक जीता। यह दूसरी बार था जब भारत का राष्ट्रगान ओलंपिक या पैरालिंपिक में निशानेबाजी पदक समारोह में बजाया गया हो।

राजस्‍थान की बेटी एवं टोक्‍यो पैरालम्पिक 2020 में स्‍वर्ण एवं कास्‍य पदक जीतकर एक नया इतिहास रचने वाली पैरा शूटर अवनि लेखरा राज्‍य की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ परियोजना की ब्रांड एबेंसडर होगी। प्रदेश के महिला एवं बाल विकास मंत्री द्वारा अवनि को इस सबंध में पत्र भेजा गया है। मात्र 19 साल की आयु मे देश के गौरवान्वित करने वाली लेखरा की सफलता राज्‍य एवं देश की दूसरी बेटियो को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

19 वर्षीय ने अपने पहले अभियान में पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रच दिया, जो सोमवार को असका शूटिंग रेंज में R2 महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 में शीर्ष पर रही। उसने फाइनल की शुरुआत से ही क्षेत्र का नेतृत्व किया, कुल 249.6 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की।

राजस्‍थान की बेटी एवं टोक्‍यो पैरालम्पिक 2020 में स्‍वर्ण एवं कास्‍य पदक जीतकर एक नया इतिहास रचने वाली पैरा शूटर अवनि लेखरा राज्‍य की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ परियोजना की ब्रांड एबेंसडर होगी। प्रदेश के महिला एवं बाल विकास मंत्री द्वारा अवनि को इस सबंध में पत्र भेजा गया है। मात्र 19 साल की आयु मे देश के गौरवान्वित करने वाली लेखरा की सफलता राज्‍य एवं देश की दूसरी बेटियो को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

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अवनि लखेरा ने जहा एक ओर अपने मेहनत एवं लग्‍न के बलबूते पर स्‍वर्ण पदक अपने नाम किया है वही दूसरी ओर अवनि पढ़ाई-लिखाई में भी काफी अव्‍वल है। निशानेबाजी के अलावा अवनि लॉ की पढ़ाई कर रही है तथा आगे आजेएस सर्विस में जाना चाहती है।

अचानक सड़क हादसे का शिकार होने के बाद जब अवनि चल-फिरने मे असमर्थ हो गई थी तो वे काफी डिप्रेशन में चली गई थी ओर खुद को ज्‍यादातर कमरे में बदं रखती है। मगर अवनि के माता-पिता ने उसे टूटने नही दिया तथा उसका हौसला बढ़ाया। अवनि अपनी पढ़ाई-लिखाई पर ध्‍यान लगा रही थी मगर उनके पिता ने उनको खेलो में ध्‍यान लगाने को कहा। बाद में जब अवनि ने अभिनव बिद्रां की जीवन पढ़ी तो वे उनसे प्रभावित हुई तथा खेल के प्रति अवनि का जोश ओर बढ़ गया। सन् 2015 में अवनि लखेरा ने जगतपुरा स्‍पोर्ट्स कॉम्‍पलेक्‍स में निशानेबाजी की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दी। जिसके बाद अवनि ने एक के बाद एक मैडल अपने नाम किए और आज पूरा देश टोक्‍यो पैरालंपिक 2020 में उनके गोल्‍ड अचीवमेंट की तारीफ कर रहा है।

गोल्‍डन गर्ल के नाम से मशहूर हुई अवनि लखेरा ने राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कई मैडल जीते है उनकी कुछ उपलब्धिया नीचे दी गई है-

वर्ष 2015 में अपनी ट्रेनिंग शुरू करने के कुछ समय बाद अवनि ने राजस्‍थान स्‍टेट चैपिंयनशिप में गोल्‍ड मैडल जीता था। 

अवनि लखेरा ने साल 2016 में आयोजित हुई नेशनल चैपिंयनशिप में भी मैडल अपने नाम किया था। इस चैपियंन शिप का आयोजन में पुणे मे हुआ था।

सन् 2018 में अवनि ने 61वीं नेशनल शूटिंग चैपिंयनशिप में भी मैडल अपने नाम किए थे।

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